मुरादाबाद, जून 4 -- सीएल गुप्ता आई इंस्टीट्यूट में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण में कथा व्यास आचार्य मिथिलेशपंदिनीशरण ने मनुओं के कार्यकाल को परिभाषित किया। उन्होंने बताया चतुर्युगी के इकहत्तर बार बीतने के बाद एक मनु काल पूरा होता है। एक मनु काल से दूसरे मनु काल में परिवर्तित को मन्वंतर कहा जाता है। वर्तमान समय वैवस्तर कहा जाता है। यह चौदह मनुओं में से सातवां है। मवंन्तर कथा का मतलब धर्म की स्थापना करते हुए मानव जाति के परंपरागत रूप से आगे बढ़ने में निहित है। उन्होंने बताया मनु की वंश परंपरा में महाराज उत्तानपाद, उनके पुत्र ध्रुव की भक्ति तथा सम्राट प्रियव्रत की वंश परंपरा में भगवान ऋषभदेव का विवरण है। यह भी पढ़ें- भागवत पुराण में मनुओं के कार्यकाल का किया वर्णन उन्होंने मनु की तीन कन्याओं के वंश विस्तार को बताते हुए अकुति और देवहूति के ...