भागवत ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला : लक्ष्मणाचार्य
मुजफ्फरपुर, जून 3 -- सकरा,हिन्दुस्तान संवाददाता। बरियारपुर थाने के फिरोजपुर सकरा में हरिहर क्षेत्र पीठाधीश्वर जगद्गुरुरामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी ने कहा कि भागवत केवल ग्रंथ नहीं है, बल्कि जीवन जीने की कला है। वे बुधवार को श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन व्यासपीठ से बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मानव जीवन से शास्त्र को हटा दिया जाए, तो मानव और पशु का अंतर मिट जायेगा। शास्त्र से धर्म ज्ञान होता है। मृत्यु के दुतिन का नाम है जरावस्था। वृद्धावस्था में अंग शिथिल हो जाता है। मुख में एक दांत भी नहीं रहता है। बूढ़े व्यक्ति लाठी का सहारा लेकर चलते हैं, फिर भी आशा पिंड नही छोड़ता है, जब तक मनुष्य धनोपार्जन में समर्थ रहता है, तभी तक उसका परिवार उससे अनुराग करते हैं। यह भी पढ़ें- भागवत ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला : लक्ष्मणा...
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