भागलपुर, मार्च 13 -- बाथ ग्राम में श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस पर श्रोताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान श्रीकृष्ण की करुणा की चर्चा करते हुए किंकरी किशोरी जी ने भगवान के बचपन के एक सखा सुदामा जी के चरित्र का वर्णन विस्तार से करते हुए बताया कि अद्भुत संतोषी ब्राह्मण थे। उनके जीवन में अभाव तो बहुत था लेकिन परम संतोष के धनी थे। इंद्रियों से विरक्त थे और हर परिस्थिति में प्रसन्न रहने वाले थे, अकिंचन थे। भगवान के परम मित्र ही नहीं परम भक्त भी थे। उन्होंने कहा कि पूरे भागवत का सार यही है कि इस घोर कलिकाल में जीव के उद्धार का एकमात्र साधन है भगवन नाम जाप। अंत में सुंदर बृज के फूलों की होली की झांकी का दर्शन हुआ।

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