उरई, जून 13 -- जालौन। संवाददाता भदवा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास पं. अशोक शास्त्री ने श्रीकृष्ण की बाल लीला और गोवर्धन पूजा का मनोहारी वर्णन किया।उन्होंने कहा कि बालकृष्ण अपने नटखट स्वभाव से सभी का मन मोह लेते थे। यशोदा मैया के पास रोज उनकी शिकायत आती थी। जब मां कहतीं कि तुम रोज माखन चुराते हो, तो कृष्ण तुरंत मुंह खोलकर दिखा देते कि मैंने माखन नहीं खाया। कथा में बताया कि एक बार कृष्ण सखाओं संग गोवर्धन पर्वत गए। वहां गोपियां 56 भोग रखकर इंद्रोज यज्ञ मना रही थीं। कृष्ण के पूछने पर उन्होंने बताया कि इंद्र पूजन से वर्षा और अन्न होता है। तब कृष्ण ने कहा- इंद्र से अधिक शक्तिशाली हमारा गोवर्धन पर्वत है। उसी से वर्षा होती है, अतः हमें गोवर्धन की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद व्रजवासियों ने गोवर्धन पूजा की। कथा व्यास ने क...