बागपत, फरवरी 10 -- बड़ौत। नगर के नीलकंठ महादेव प्राचीन मंदिर परिसर में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा आयोजित की गई कथा के दूसरे दिन अचार्य अनुज दिक्षित द्वारा धुंधकारी का प्रसंग सुनाया गया । मंदिर के प्रथम वार्षिकोत्सव पर आयोजित कथा में कथावाचक ने बताया की बताया कि आत्मदेव ब्राह्मण के घर पैदा हुए बेटे ने अपने कर्म इतने बुरे हो गए कि वह मरने के बाद प्रेत बन गया था। जीवन में चोरी करने से लेकर माता-पिता से मारपीट तक की अपने कर्मों के आधार पर मरने के बाद प्रेत बन गया फिर गोकर्ण ने विधि विधान से घर पर श्रीमद् भागवत कथा का पाठ कराया। जिसके सुनने से धुंधकारी प्रेत आत्मा से मुक्त हुआ। कहा कि जब भगवान कृष्ण कथा सुनने मात्र से प्रेत के पापों को दूर करते हैं, तो इंसान के समस्त पाप को दूर करना उनके लिए कोई ज्यादा बड़ी बात नहीं है। मंदिर प्रबंधक अमित जैन ...