हाथरस, जून 5 -- सहपऊ। क्षेत्र के गांव बुर्ज बाली स्थित धर्मशाला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास श्री गोपाल शास्त्री ने अपने मुखारविंद से राजा परीक्षित और कलयुग के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि महाराज परीक्षित के राज्यकाल में धर्म, सत्य और न्याय की स्थापना थी। एक बार राजा परीक्षित ने देखा कि कलयुग धर्म और गौ माता को कष्ट पहुंचा रहा है। इस पर उन्होंने कलयुग को अपने राज्य से बाहर जाने का आदेश दिया। तब कलयुग ने राजा से निवास के लिए स्थान मांगा।

राजा परीक्षित का आदेश कथा व्यास ने बताया कि राजा परीक्षित ने कलयुग को चार स्थान प्रदान किए- जुआ, मदिरापान, अवैध संबंध और हिंसा। बाद में कलयुग के बार-बार आग्रह करने पर उसे स्वर्ण (धन) में भी निवास की अनुमति दी गई। इसी कारण जहां लोभ, लालच और अधर्म बढ़ता है, वहां कलय...