बुलंदशहर, मई 31 -- पहासू के गांव कसूमी में शिव मंदिर पर आयोजित भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य पवन भारद्वाज ने शुकदेव के जन्म की कथा का वर्णन किया।कहा कि कलयुग में भागवत कथा का श्रवण करना कल्पवृक्ष से भी बढ़कर है। भागवत कथा अर्थ, धर्म, काम के साथ-साथ भक्ति और मुक्ति प्रदान कर जीव को परम पद प्राप्त कराती। इसके एक-एक अक्षर में भगवान समाए हुए हैं।इस कथा को सुनना दान, व्रत, तीर्थ से भी बढ़कर है। उन्होंने बताया कि मनुष्य से गलती होना बड़ी बात नहीं है, लेकिन गलती को समय रहते सुधार करना जरूरी है।उन्होंने कहा कि श्रीमदभागवत केवल सुन लेना भी काफी नहीं है। भागवत के श्रोता के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए।परमात्मा दिखायी नहीं देता पर हर किसी में बसता है। उन्होंने राजा परीक्षित को श्राप लगने का प्रसंग,शुकदेव का जन्म तथा आत्मदेव की कथा सु...