भागलपुर, नवम्बर 15 -- भागलपुर जिले के चुनावी इतिहास में पिछले 25 साल में यह पहला मौका है जब महागठबंधन का सूफड़ा साफ हो गया। जिले की सातों सीट पर एनडीए के घटक दलों ने न सिर्फ जीत दर्ज की बल्कि लंबे अंतर से महागठबंधन के प्रत्याशियों को शिकस्त दी। खास यह कि 2010 के चुनाव को जब एनडीए की आंधी बतायी गई तब भी जिले के कहलगांव विधानसभा में सदानंद सिंह ने कांग्रेस की झोली में अपनी सीट डाली थी। लेकिन इस बार ऐसा नहीं रहा। पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक महागठबंधन का तमाम किला ध्वस्त हो गया है। 2010 में नाथनगर, सुल्तानगंज, गोपालपुर, बिहपुर, भागलपुर और पीरपैंती से एनडीए के घटक दलों ने जीत हासिल की थी। अकेले कहलगांव सीट पर कांग्रेस की जीत हुई थी। 2015 में बाजी पलटी। जदयू राजद के साथ मिलकर चुनाव में उतरा था। नतीजा यह हुआ कि जिले की सातों सीटों पर एन...
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