मेरठ, मार्च 10 -- जैव-विविधता में शैवाल बेहद महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ये ना केवल ऑक्सीजन उत्पादन में सहायक हैं बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में अपनी भूमिका निभाते हैं। शैवाल ऊर्जा के स्रोत हैं और भविष्य में यह ऊर्जा का मुख्य केंद्र बनकर उभरेंगे। बॉयो-फ्यूल के रूप शैवाल ऊर्जा जरुरत पूरा करने का विकल्प बन सकते हैं। शैवाल और इससे उपयोग में व्यापक संभावनाएं हैं। सीसीएसयू कैंपस के बॉटनी विभाग में सोमवार को 'अल्गल रिसर्च, बॉयोडायवर्सिटी एंड बॉयोटेक्नोलॅजी' विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं प्रशिक्षण के शुभारंभ में यह बात बतौर मुख्य वक्ता प्रो.अमरीक सिंह अहलूवालिया ने कही। प्रो.अहलूवालिया ने कहा कि शैवाल से उपयोगी उत्पाद बनाए जाते हैं। शैवाल से पोषण सप्लीमेंट, दवाइयां, कॉस्मेटिक उत्पाद और प्राकृतिक रंग तैयार होते हैं। बॉयोफ्यूल, बायोप्लास्टिक, जैव उर्वरक...
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