नई दिल्ली, मार्च 27 -- पश्चिम एशिया में शांति के लिए अमेरिका को किसी ऐसे विश्वसनीय मध्यस्थ की तलाश करनी चाहिए, जिस पर ईरान पूरा भरोसा कर सके। मौजूदा हालात में अमेरिका और ईरान के बीच भरोसे की इतनी कमी हो चुकी है कि बिना किसी विश्वसनीय मध्यस्थ के सार्थक-वार्ता संभव नहीं दिखती। पहली समस्या यही है कि अमेरिका के बयानों और कदमों में एकरूपता नहीं दिखती। एक तरफ, वह युद्ध-विराम का प्रस्ताव देता है, दूसरी तरफ, उसके पुराने रुख व दबाव की नीति ईरान को उस पर भरोसा करने से रोकती है। ऐसे में, ईरान द्वारा प्रस्ताव का मजाक उड़ाना केवल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि अविश्वास का संकेत है। दूसरी ओर, एक निष्पक्ष मध्यस्थ की कमी साफ दिखाई देती है। इतिहास बताता है कि जब भी दो देशों के बीच तनाव चरम पर होता है, तब तीसरे पक्ष की भूमिका निर्णायक होती है। यहां भी ऐसे किसी पक...