मिर्जापुर, फरवरी 5 -- हलिया। कस्बे के माता चौरा मंदिर परिसर में चल रही संगीतमय रामकथा में गुरुवार को भरत-राम मिलन प्रसंग की कथा सुन श्रोता भावविह्वल हो गए। कथावाचक पं. उमानाथ महाराज ने रामायण के सातवें दिन चित्रकूट में हुए भरत-राम मिलन का भावपूर्ण वर्णन किया। कथावाचक ने कहा कि भरत का राज्य स्वीकार करने से इंकार कर अपने भाई राम को मनाने चित्रकूट जाना, त्याग और भातृ प्रेम की अनुपम मिसाल है। कामदगिरि पर्वत के पास हुए दोनों भाइयों के मिलन ने पूरे संसार को पारिवारिक प्रेम और मर्यादा का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि राम ने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए अयोध्या लौटने से इंकार कर दिया और वनवास के दौरान लगभग 11 वर्ष छह माह सीता व लक्ष्मण के साथ चित्रकूट क्षेत्र में निवास किया। मंदाकिनी नदी के तट पर बिताए गए यह दिन आज भी श्रद्धा का केंद्र हैं। कथा...