बदायूं, मई 30 -- नगर के फेस-2 स्थित श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें दिन आचार्य सत्यनारायण महाराज ने अयोध्या कांड का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम ने पिता की आज्ञा और मर्यादा की रक्षा के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया और कंदमूल खाकर धर्म का आदर्श प्रस्तुत किया। महाराज ने बताया कि भरत जी जब श्रीराम को मनाने चित्रकूट पहुंचे, तो प्रभु ने मर्यादावश लौटने से इंकार कर दिया। इसके बाद भरत जी उनकी चरण पादुकाएं सिंहासन पर रखकर स्वयं नंदीग्राम में तपस्वी रूप में रहे। कथा में सीता हरण, सुग्रीव से मित्रता और हनुमान जी द्वारा सीता जी की खोज के भावपूर्ण प्रसंग भी सुनाए गए। इस अवसर पर विनोद गुप्ता, पवन शर्मा, संजीव गुप्ता, दीपक वर्मा, राजीव अग्रवाल, मनोज गुप्ता, अरविंद शर्मा व राहुल गुप्ता सहित भा...