भरण-पोषण मामले में हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, जज ने मनुस्मृति का श्लोक सुनाकर समझाया पति का कर्तव्य
नई दिल्ली, अक्टूबर 30 -- प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि पत्नी, नाबालिग बच्चों और आर्थिक रूप से असमर्थ बुजुर्ग माता-पिता का भरण-पोषण करना पति का न केवल कानूनी बल्कि पवित्र दायित्व भी है। कोर्ट ने इस संदर्भ में मनुस्मृति के अध्याय 11 श्लोक 10 का हवाला दिया। न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने यह टिप्पणी कानपुर नगर की फैमिली कोर्ट द्वारा निर्धारित भरण-पोषण राशि बढ़ाने की मांग को लेकर पत्नी पिंकी वर्मा व अन्य की निगरानी पर सुनवाई करते हुए की। कोर्ट ने मनुस्मृति के श्लोक को उद्धृत किया: वृद्धौ च मातापितरौ साध्वी भार्या सुतः शिशुः। अपकार्यशतं कृत्वा भर्तव्या मनुर्ब्रवीता। यानि वृद्ध माता-पिता, सदाचारी पत्नी और छोटे बच्चे का भरण-पोषण किया जाना चाहिए, भले ही इसके लिए सौ अनुचित कार्य क्यों न करने पड़ें, ऐसा मनु ...
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