नई दिल्ली, अप्रैल 29 -- नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि समाज में नफरत फैलाने वाले भड़काऊ भाषण (हेट स्पीच) के अपराध से निपटने के लिए मौजूदा आपराधिक कानून पर्याप्त हैं। शीर्ष अदालत ने अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी करने से इनकार करते हुए कहा कि 'कानून में ऐसी कोई कमी या खालीपन नहीं है, जिसमें दखल देने की जरूरत हो।' हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकारों के लिए यह विकल्प खुला है कि वे अपनी समझदारी से बदलते सामाजिक बदलावों और चुनौतियों को देखते हुए कि क्या किसी और कानूनी कदम की जरूरत है या फिर 23 मार्च 2017 की विधि आयोग की 267वीं रिपोर्ट में दिए गए सुझावों के अनुसार उचित संशोधन करने पर विचार कर सकते हैं। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने भड़काऊ भाषण के अपराध से निपटन...