भगवान से संबंध और समर्पण से पुष्ट होती हैं भक्ति
भभुआ, अगस्त 19 -- पेज चार की फ्लायर खबर भगवान से संबंध और समर्पण से पुष्ट होती हैं भक्ति ऋषि परंपरा केवल वंश नहीं, ज्ञान और संस्कारों की धरोहर संयम, कर्मफल और सद्गुणों को जीवन में उतारने का दिया संदेश भभुआ, नगर संवाददाता। परासियां स्थित चातुर्मास्य महायज्ञ महामहोत्सव में मंगलवार को परम पूज्य श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भक्ति, ऋषि परंपरा, संयम और कर्मफल का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भक्ति तभी पुष्ट होती है, जब जीवन में भगवान के प्रति विश्वास, अपने और भगवान के संबंध का बोध और पूर्ण समर्पण हो। माता देवहूति ने भगवान कपिलदेव से भक्ति की पुष्टि का उपाय पूछा था। भगवान ने उन्हें विश्वास, संबंध और समर्पण का मार्ग बताया। देवहूति ने भगवान कपिलदेव को हृदय और बुद्धि में धारण कर उनका स्मरण करते हु...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.