भगवान शिव से गृहस्थ जीवन सीखने का सार
कुशीनगर, मई 31 -- कुशीनगर। कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने स्वर्ग एवं नरक की सुंदर व्याख्या करते हुये कहा कि मनुष्य जब अपनी अज्ञानतावश भौतिक सुख के लिए दुराचार, पापाचार, व्यभिचार, भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाता है, तो उसे नारकीय जीवन यापन करना पड़ता है। वह परमात्मा तक नहीं पहुंच पाता है एवं बार-बार जीवन मरण लीला में भटकता रहता है। उन्होंने कहा कि इस कलियुग में श्रीमद् भगवत् एवं श्रीरामचरित मानस रूपी गंगा ही, प्राणी को इस भवसागर से पार कराकर आत्मा का परमात्मा से मिलन करा सकती है यानि स्वर्ग की प्राप्ति संभव है। इस कलियुग में केवल राम नाम एवं सत्संग ही मोक्षाधार है। यह भी पढ़ें- अमेठी-सती विवाह व पार्वती जन्म के प्रसंग का किया वर्णन दुदही नगर पंचायत के श्रीराम जानकी मंदिर समिति के द्वारा श्रीराम जानकी मंदिर प्रांगण में कथा के दूसरे दिन शनिवार...
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