वाराणसी, मार्च 28 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। भगवान की लीला के अनेक दृष्टियां होती हैं। श्रीमद्भागवत के प्रत्येक पात्र भागवत हैं। भगवान ने असुरों को मार कर अपने में मिला लिया क्योंकि असुरों के मूल भी भगवान हैं। भगवान ने पूतना, अघासुर, बकासुर और कंस का वध कर उन्हें सद्गति प्रदान की। जगद्गुरु स्वामी नारायणानंद तीर्थ महाराज ने ये बातें अस्सी स्थित श्रीकाशीधर्मपीठ रामेश्वर मठ में श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ सप्ताह के पांचवें दिन शनिवार को प्रवचन में कहीं। जगद्गुरु ने कहा कि सृष्टि में वात्सल्य की असीम शक्ति मां है। मां का निराकार भाव ही दूध के रूप में साकार होकर आता है। हर मां का छोटा सा बालक उसके लिए भगवान का रूप होता है। उसके भीतर संपूर्ण विश्व छिपा है। यशोदा मैया ने भगवान श्रीकृष्ण के मुख में दो बार संपूर्ण ब्रह्मांड देखा। मां पूर्णता और एकाग्...