लखनऊ, दिसम्बर 14 -- ऋषि सेवा समिति की ओर से चिनहट के मटियारी स्थित ऑन द ग्रिल में आयोजित भागवत कथा में रविवार को कथाव्यास राघव ऋषि जी महाराज ने सुदामा चरित्र की मार्मिक व्याख्या की। उन्होंने कहा कि जीव यदि दो कदम प्रभु के लिए आगे बढ़ाता है तो भगवान सौ कदम आगे बढ़ाते हैं। भगवान मनुष्य के वस्त्र या धन नहीं अपितु निर्मल हृदय देखते हैं। गरीब होना अपराध नहीं है परन्तु गरीबी में प्रभु को भूल जाना अपराध है। कथा मध्य सौरभ ऋषि ने अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो... भजन सुनाया तो श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। राघव ऋषि जी ने कहा कि मनुष्य सुख पाना चाहता है परन्तु सही दिशा में प्रयास नहीं करता है। मनुष्य का स्वभाव है वह बिना किसी प्रयत्न और कष्ट के सुख चाहता है। मनुष्य पुण्य करना नहीं चाहता फिर भी पुण्य के फल की इच्छा रखता है। पाप करता है फिर भी पाप के ...