भागलपुर, मई 11 -- कहलगांव, निज प्रतिनिधि भगवान के शरण में जाने से हमें सिर्फ उनकी कृपा ही प्राप्ति होती है। इसलिए हमें प्रभु की शरण में जाना चाहिए। दुख में तो सभी प्रभु का स्मरण करते हैं कष्ट निवारण की गुहार लगाते हैं लेकिन सुख में आनंदमयी जीवन गुजारने में प्रभु को भूल जाते हैं। सुख हो या दुख प्रभु को भूले नहीं। यह बातें सनोखर शिव मंदिर परिसर में आयोजित महारुद्र यज्ञ के अवसर पर चल रही संगीतमय श्रीराम कथा में कथा वाचिका अनुराधा सहचरी ने कही। उन्होंने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम की भक्ति, करुणा और कृपा का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान अपने भक्तों पर बिना किसी कारण के दया बरसाने वाले हैं। उनकी शरण में जाने वाला व्यक्ति कभी निराश नहीं होता, बल्कि उसे प्रभु की असीम कृपा और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।कथा वाचिका ने रामायण के मिथिला प्रसंग ...