रामपुर, जनवरी 23 -- शाहबाद। जीवन को सुख, शांति और कल्याण की ओर ले जाने के लिए मनुष्य को ईश्वर की भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए। भक्ति से ही आत्मिक उन्नति संभव है और जीवन का वास्तविक उद्देश्य पूर्ण होता है। यह विचार हरिद्वार से पधारे संत स्वामी व्यासानंद ने गहनी गांव में आयोजित विराट संतसंग के दूसरे दिन प्रवचन करते हुए व्यक्त किए। कहा कि परमात्मा ने मनुष्य को चौदह इंद्रियां प्रदान की हैं। यदि मनुष्य इन इंद्रियों का सदुपयोग कर सत्कर्म करता है, तो वह परमात्मा को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि आज का मानव संसार रूपी माया, लोभ और मोह में फंसकर अपने जीवन के लक्ष्य से भटक गया है। जब तक मनुष्य अपने मन, वाणी और कर्म को शुद्ध नहीं करता, तब तक सच्चा सुख प्राप्त नहीं हो सकता। कथाव्यास ने संतों के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संतजन संसार की माया...
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