भागलपुर, फरवरी 25 -- भगवान की भक्ति से मुक्ति मिल जाती है। यदि भक्ति सच्चे मन से और श्रद्धा भाव से की जाए तो भगवान दर्शन देते हैं तथा इस नश्वर शरीर से मोक्ष की प्राप्ति कराते हैं। अतः भक्ति मुक्ति का कारक तत्व है। उक्त बातें सुंदरपुर शाखा कृषि फार्म मैदान में चल रहे नौ दिवसीय पांच कुंडीय महारुद्र महायज्ञ में श्रीमद्भागवत कथा वाचन करते हुए आगमानंद महाराज ने कही मंगलवार की शाम को कही। उन्होंने कहा कि भगवान की लीला अपरंपार है, इसे कोई नहीं जान सकता। जीव संसार में तमोगुणी प्रवृत्ति को प्राप्त कर अनेक प्रकार के दुख झेलता है। उन्होंने कहा कि बाल्यकाल से ही भगवान को प्राप्त करने की भावना होनी चाहिए, तभी भगवान की प्राप्ति होती है। इस संदर्भ में उन्होंने बालक ध्रुव की कथा का संगीतमय विस्तृत प्रसंग सुनाया। काफी संख्या में श्रद्धालु कथा का आनंद ले र...
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