मिर्जापुर, अप्रैल 23 -- हलिया। क्षेत्र के हथेड़ा में चल रहे संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिवस बुधवार को कथा व्यास पंडित विष्णु धर द्विवेदी ने बताया कि जब तक भगवान कारागार में थे, तब तक दुनिया को आनंद नहीं आया और जब वही भगवान इंद्रिय रूपी गोकुल में आ गए। तो संपूर्ण विश्व में आनंद की लहर दौड़ गई। जब भगवान अंतरंग में रहेंगे तो आनंद आने वाला नहीं है। भगवान की अनुभूति इंद्रियों में होनी चाहिए। जिससे भगवत प्राप्ति हो सके। कथा वाचक ने कहा कि पूतना भगवान को लेकर भागी। जो अविद्या है। जब मानव मात्र के शरीर में प्रवेश करती है, तब वह मनुष्य को बहुत सुंदर लगती है। जब वही अविद्या विकराल रूप धारण कर लेती है,तो पूतना जैसी हो जाती है। जो अत्यंत कष्ट का हेतु बनती है। भगवान कृष्ण की गोकुल, वृंदावन, माखन लीलाएं,गोवर्धन की लीला का विस्तृत वर्णन करते ह...
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