गोंडा, मई 10 -- रुपईडीह, संवाददाता। प्रेम मौन होता है,जो बोलता है वह प्रेम हो ही नहीं सकता। प्रेम में वाणी अवरोध हो जाती है। प्रेम में जीव बोलने लायक नहीं रह जाता है, जब प्रेम हो जाएगा तो मन सुनने का ही मनकरता है। समस्त आशाओं का त्याग कर भगवान का भरोसा हो जाए तो वह जीव धन्य हो जाता है जो भगवान के भरोसे होगा वह जीव धन्य हो जाता है। यह जगत व्यवहार करने के लिए है। परमात्मा प्यार करने के लिए जो इसे स्वीकार किया वह धन्य है। जगत कब धोखा दे दे यह निश्चित नहीं है पर भगवान कभी धोखा नहीं देते, यह निश्चित है। जिओ पर चाहे जितना भी विभक्ति आए पर ईश्वर से विश्वास एवं भरोसा रखना ही व्यक्ति की भक्ति की पहचान है। यह भी पढ़ें- तन को मुक्ति और मन को शांति देती है श्रीमद्भागवत कथा : पं. शुभमकथा व्यास राजन जी महाराज की शिक्षाएं यह बातें कथा व्यास राजन जी महार...