नई दिल्ली, अप्रैल 15 -- मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध प्रेमानंद महाराज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनके दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। भक्त उनसे अपने मन की जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त करते हैं। प्रेमानंद महाराज जी से लोग तरह-तरह के प्रश्न पूछते हैं, जिनका वे बहुत ही सरल और सहज तरीके से उत्तर देते हैं।। ऐसे ही एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज जी से पूछा कि कण-कण में भगवान हैं, तब एक ही समय में करोड़ों-अरबों के मन की बात कैसे सुन और समझ लेते हैं। चलिए जानते हैं कि महाराज जी ने क्या जवाब दिया। यह भी पढ़ें- प्रेमानंद महाराज: प्रार्थना करने से भी भगवान इच्छा पूरी क्यों नहीं करते हैं?'इन्द्रियाणां मनश्चास्मि' इस सवाल का जवाब देते हुए महाराज जी कहते हैं कि इन्द्रियाणां मनश्चास्मि। वही मन बने हुए हैं। भगवान कह रहे हैं कि इंद्रियों में म...