नई दिल्ली, मार्च 22 -- किंशुक पाठक, एसोसिएट प्रोफेसर, पंजाब केंद्रीय विवि आज, यानी 23 मार्च की तारीख भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में केवल एक दिवस नहीं, बल्कि उस ज्वलंत समर्पण का प्रतीक है, जिसकी लौ का तेज-पुंज कभी मंद नहीं पड़ा। आज शहीद दिवस पर, जब हम भारतीय आंदोलन के शूरवीर भगत सिंह को याद करते हैं, तो मन में यही सवाल उठता है कि क्या हम उनके सपनों के योग्य हैं? भगत सिंह मात्र क्रांतिकारी नहीं थे, वह एक विचारक, लेखक और पत्रकार भी थे। उन्होंने माना कि बंदूक से पहले विचारों की क्रांति आवश्यक है, इसलिए उन्होंने पत्रकारिता को भी स्वतंत्रता का स्वर बनाया। भगत सिंह की पत्रकारिता की यात्रा बहुत जल्द प्रारंभ हुई। कानपुर के प्रताप अखबार में उन्होंने सबसे पहले काम किया। फिर अमृतसर से निकलने वाली पंजाबी पत्रिका किरती के संपादकीय समूह का हिस्सा...