भक्त वत्सल होते हैं भगवान
मुंगेर, मार्च 27 -- तारापुर,निसं.। तारापुर नगर के सोनडीहा रत्नेश्वर धाम महादेव मंदिर प्रांगण में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के आठवें दिन गुरुवार को कथावाचक आचार्य अखिलेशानंद महाराज ने भगवान श्री कृष्ण के गृहस्थ लीला और सुदामा चरित्र का वर्णन किया। कथावाचक ने कहा कि सुदामा परम संतोषी, त्याग और समर्पण के प्रतीक और भगवान श्री कृष्ण के अनन्य सखा थे। उन्होंने कहा कि, भगवान भाव और प्रेम की भूखे होते हैं । प्रभु श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहण आज भी दिया जाता है। कृष्ण ने सुदामा के ऊपर ऐसी कृपा की कि,द्वारिका पुरी के समान ही सुदामा पुरी बनाकर दे दिया। भगवान भक्त वत्सल हैं। अपने भक्तों पर सदैव कृपा करते हैं। भागवत महापुराण साक्षात भगवान श्री कृष्ण के ही स्वरुप हैं।
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