अंबेडकर नगर, मई 24 -- इंदईपुर, संवाददाता। हंसवर के काजीपुर में चल रहे सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक त्रयंबकेश्वर ठाकुरजी महराज ने कहा कि भगवान हमेशा भक्त के बस में होते है। कथा के श्रवण से भक्ति प्राप्त होती है। कथा का अपमान करने वाले को निश्चित ही समय आने पर उसका फल भोगना पड़ता है। चाहे वह कोई देवता हो, दानव हो या मानव। उसके प्रभाव से कोई बच नहीं सकता। माता सती को भी कथा का अपमान करने के कारण दक्ष के यज्ञ में अपनी आहुति देनी पड़ी थी। जिस समय महाराजा दक्ष के घर यज्ञ होना था, सारे देवताओं को सूचना दी गयी लेकिन भगवान भोले शंकर को सूचना नहीं दी गयी। इस बात की जानकारी माता सती को होने के पश्चात उन्होंने यज्ञ में जाने का जिद किया। भगवान ने मना किया फिर भी वह नहीं मानी और उस फलस्वरूप उनके अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी। कथावाचक...