कन्नौज, नवम्बर 9 -- गुगरापुर,कन्नौज, संवाददाता। याज्ञवल्क्य आश्रम, जलेसर गंगा तट पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को कथा व्यास गंगा नारायण त्रिपाठी ने भगवान कपिल के अवतार की कथा सुनाते हुए कहा कि सृष्टि के आरंभ से ही जब-जब भक्तों की आस्था डगमगाई या धर्म की रक्षा की आवश्यकता हुई, तब-तब प्रभु ने स्वयं अवतार लेकर मानवता को दिशा दी है। कथा व्यास ने बताया कि ब्रह्मा जी की छाया से उत्पन्न कर्दम ऋषि ने ब्रह्मा जी से अपने कर्म की आज्ञा मांगी। इस पर ब्रह्मा ने उन्हें भगवान विष्णु की उपासना करने को कहा। कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने ऋषि कर्दम को वरदान दिया और गृहस्थ धर्म का पालन करने का आदेश दिया। ऋषि कर्दम ने प्रभु से कहा कि वे तभी विवाह करेंगे जब स्वयं भगवान उनके पुत्र बनकर अवतरित होंगे। प्रभु ने उन्हें आश्वासन देते हु...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.