कानपुर, जून 11 -- कानपुर। माधव मिशन आयोजित एमआईएच अवधपुरी के सत्संग हाल में चल रहे भागवत सप्ताह यज्ञ के तीसरे दिन कथा में महामंडलेश्वर एवं भगवताचार्य डॉ. विजया माधव डीलिट ने कथा सुनाई। बताया कि ज्ञानेन्द्रियों के माध्यम से जाने गए रूप, रस, गंध, स्पर्श से जब मन मोहित नहीं होता है तब समाधि सहज हो जाती है। जब श्रीकृष्ण हृदय में विराजमान हैं तो किसी अन्य के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। भक्ति में स्थिरता होनी चाहिए, जो रसों का समूह है वही ब्रह्म है। मीराबाई ने सारा वैभव छोड़ के कृष्ण को तन मन धन से अंगीकार किया और कृष्ण में विलीन हो गईं। भगवान आसानी से भक्ति नहीं देते हैं। यहां डॉ. योगेंद्र सिंह, डॉ. सृष्टि माधव, डॉ. स्वीटी श्रीवास्तव, डॉ. दीपा प्रधान आदि उपस्थित रहे।

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