बस्ती, मार्च 22 -- बस्ती, निज संवाददाता। भक्ति के मार्ग में अहंकार का कोई स्थान नहीं होता है। भक्त का जिस रूप में समर्पण होगा, उसे परमात्मा की छवि उसी अनुरूप दिखायी पड़ेगी। जीवन के जो चारो घाट और दिशायें हैं, उसमें श्रीराम कथा की मानस गंगा प्रवाहित है। यह बातें कथा व्यास स्वामी स्वरूपानन्द ने नारायण सेवा संस्थान की ओर से रामविवाह मैदान दुबौलिया में आयोजित रामकथा के दौरान कही। कथा व्यास ने सती प्रसंग, दक्ष यज्ञ विध्वंस के अनेक प्रसंगों की भक्तिमय व्याख्या करते हुये कहा कि शिव आराधना की उपेक्षा का फल दक्ष को मिला। कथा श्रवण के लाभ, जीव के शिव तत्व में विलय होने और श्रीराम जन्म की पृष्टिभूमि बनाते हुये महात्मा ने कहा कि भक्ति की पूर्णता तो भाव में है। श्रीराम कथा से जीवन सुधरता है। कुविचार के स्थान पर सुविचार का जन्म होता है।

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