देहरादून, जनवरी 12 -- हरियाणा के समालखा स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल में आयोजित 'भक्ति पर्व समागम' में निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने कहा कि भक्ति केवल शब्द या दिखावा नहीं। बल्कि आत्ममंथन और जागरूक जीवन जीने की यात्रा है। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति स्वयं की कमियों को पहचानकर उन्हें सुधारने और हर एक में निराकार को देखने से प्रकट होती है। समागम में निरंकारी राजपिता रमित जी ने कहा कि भक्ति कोई पद या पहचान नहीं, बल्कि ब्रह्मज्ञान के बाद करता-भाव से मुक्त जीवन जीने का ढंग है। कार्यक्रम में परम संत संतोख सिंह जी के योगदान का स्मरण किया गया। वहीं सोमवार को देहरादून स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में भी भक्ति पर्व दिवस मनाया गया। जहां संयोजक नरेश विरमानी ने भक्ति, सेवा और समर्पण के महत्व के बारे में बताया।
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