भक्ति के बिना ज्ञान और वैराग्य अधूरे हैं
हाथरस, जुलाई 20 -- हाथरस। श्रीकृष्ण गौशाला, गौशाला में श्री गिरिराज भगवान एवं प्रातःस्मरणीय परम पूज्य पंडित गया प्रसाद महाराज की परम पावन तपोभूमि में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन आचार्य वल्लभ जी महाराज ने परीक्षित शुकदेव संवाद, भगवान कपिलदेव द्वारा माता देवहूति को प्रदत्त सांख्य योग का दिव्य उपदेश, ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि की रचना, भीष्म स्तुति, सती चरित्र, माता पार्वती की कठोर तपस्या तथा भगवान शिव-पार्वती विवाह का वर्णन किया। कथाव्यास ने कहा कि राजा परीक्षित और शुकदेव जी का संवाद संसार के प्रत्येक जीव के लिए आदर्श है। जब जीवन का अंतिम समय निकट हो। तब मनुष्य को समस्त सांसारिक मोह का त्याग कर भगवान के नाम, कथा और भक्ति में अपने मन को लगाना चाहिए। यह भी पढ़ें- गुरु की आज्ञा, निस्वार्थ प्रेम और भगवान के नाम में ही...
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