भक्ति के बिना ज्ञान अधूरा और वैराग्य के बिना स्थिर नहीं रहती भक्ति
बरेली, मई 24 -- मीरगंज, संवाददाता। यह भी पढ़ें- भक्ति, ज्ञान व वैराग्य के महत्व को बताया नगरिया कल्यानपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन कथा व्यास जगदीश चंद पाठक ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण में ज्ञान और वैराग्य को भक्ति का सहायक बताया गया है। ज्ञान मनुष्य को सत्य का बोध कराता है। वैराग्य संसार मोह-माया से दूर रहने की प्रेरणा देता है। भक्ति के बिना ज्ञान अधूरा है। वैराग्य के बिना भक्ति स्थिर नहीं रहती। यह भी पढ़ें- अंबा बिशनपुर में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा स्थल पर भक्तों की भीड़ लगी रहीभक्ति, ज्ञान और वैराग्य का महत्व कथा व्यास ने कहा भक्ति माता वृद्ध हो गई थीं। उनके पुत्र ज्ञान और वैराग्य भी दुर्बल हो गए थे। जब संतों ने उन्हें भगवान के नाम और भागवत कथा का श्रवण कराया, तब ज्ञान और वैराग्य फिर से जागृत हो गए। मनुष्य जब...
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