भक्ति केवल कर्मकांड नहीं, ईश्वर तत्व को अनुभव करने की साधना : स्वामी निरंजनानंद
मुंगेर, सितम्बर 10 -- मुंगेर,हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। पादुका दर्शन आश्रम में लक्ष्मी नारायण यज्ञ के दूसरे दिन बुधवार को यज्ञस्थल पर वैदिक मंत्रोच्चार, संकीर्तन और हवन से वातावरण भक्तिमय बना रहा। इस अवसर पर परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने कहा कि भक्ति केवल पूजा-पाठ और कर्मकांड तक सीमित नहीं है। यह अपने भीतर गुरु और ईश्वर तत्व को अनुभव करने की साधना है। भक्ति तभी सार्थक होती है, जब उससे जीवन में प्रेम, सेवा, समर्पण और आत्मशुद्धि का भाव उत्पन्न हो। कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी सत्यानंद के जयघोष और भजन से हुआ। स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने आश्रम आने के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि आश्रम आने के बाद उन्होंने योग और प्राणायाम का अभ्यास किया तथा सहज भाव से साधना में लगे रहे। यह भी पढ़ें- पादुका दर्शन आश्रम में लक्ष्मी नारायण यज्ञ शुरू, गुरु स्म...
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