दुमका, मार्च 14 -- बड़ा बांध दुमका परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्री श्री 1008 लक्ष्मीनारायण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ का समापन शनिवार को अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ हुआ। यज्ञ के सातवें एवं अंतिम दिन बड़ी संख्या में उमड़े श्रद्धालुओं ने भागवत कथा का रसपान किया और पूर्णाहुति के साथ समस्त जगत के प्राणियों के लिए शांति एवं मंगल कामना की। कथा के अंतिम दिन स्वामी रामचंद्रचार्य ने भक्त और भगवान के प्रेम के प्रतीक सुदामा चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कृष्ण-सुदामा की मित्रता नि:स्वार्थ प्रेम और समर्पण की पराकाष्ठा है। इसके पश्चात, द्वादश स्कंध की व्याख्या करते हुए राजा परीक्षित के मोक्ष और तक्षक दंश की लीला का वर्णन किया गया। गुरुजी ने समझाया कि श्रीमद्भागवत का श्रवण मात्र ही कलियुग में भवसागर से पार उतरने का सुगम मा...