लखनऊ, अप्रैल 24 -- लखनऊ, संवाददाता। चिन्मय मिशन की ओर से आयोजित पांच दिवसीय ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन शुक्रवार को शाम के सत्र में प्रयागराज चिन्मय मिशन की ब्रह्मचारिणी शाश्वती चैतन्यजी आचार्य ने गीता के भक्तियोग (12वें अध्याय) पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को 'षट् सम्पत्ति'- शम (मन का निग्रह) और दम (इन्द्रियों का संयम) को जीवन में अधिक से अधिक विकसित करना चाहिए। इससे जीवन की परिस्थितियों में हमारी प्रतिक्रियाएं धीरे-धीरे कम होकर मन शांत होता है।उन्होंने कहा कि शांत चित्त ही अध्यात्म मार्ग में सही दिशा दिखाता है। आत्मा और ब्रह्म में कोई भेद नहीं है। ज्ञानी व्यक्ति सबके हित की कामना करता है, क्योंकि उसकी दृष्टि में पूरा जगत 'सिया राममय' होता है, इसलिए उसके लिए कोई दूसरा नहीं रहता। उन्होंने गीता के एक श्लोक को पढ़ते हुए उद्धृत करते हुए...