मेरठ, मार्च 19 -- श्री कैलाश पर्वत के मुख्य जिनालय पर संसार की सुख, शांति एवं समृद्धि के लिए चल रहे भक्तामर विधान के 40वें दिन भगवान का नित्य नियम पूजन किया गया। गुरुवार को 131 परिवारों की ओर से भक्तामर विधान का आयोजन किया गया। विधान के मध्य मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि मूर्ख के हृदय में कुमति उपजती है और ज्ञानियों के हृदय में सुमति का प्रकाश रहता है। दुर्बुद्धि कुब्जा के समान हैं, नवीन कर्मो का बंध करती है और सुबुद्धि आत्मराम में रमण कराती है। कुबुद्धि काली कूबडी कुब्जा के समान है, संसार में संताप उपजाती है और सुबुद्धि राधिका के समान है। जिन आत्मा की उपासना कराती तथा स्वयं का भेद जानती है। भगवान की शांतिधारा उज्जवल जैन, सुनील जैन व स्वर्ण कलश अभिषेक सुरेंद्र जैन ने किया। आरती का दीप प्रज्वलित समीक्षा जैन, सीमा जैन ने किया। सांयकाल में ...
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