बढ़ते आक्रोश, घटते संवाद से टूट रही जीवन की डोर
रामपुर, अगस्त 31 -- जिंदगी की उलझनों से जूझते हुए जब संवाद के रास्ते बंद होने लगते हैं तो कई लोग गुस्से, तनाव और निराशा के ऐसे भंवर में फंस जाते हैं, जहां उन्हें मौत ही आखिरी रास्ता नजर आने लगती है। रामपुर में आत्महत्या के बढ़ते मामले इसी गंभीर संकट की ओर इशारा कर रहे हैं। पिछले 10 दिनों में ही जिले में पांच लोगों ने आत्महत्या कर ली, जबकि गुरुवार को एसपी कार्यालय में तैनात सिपाही की आत्महत्या ने पुलिस महकमे को भी झकझोर दिया। जिले में एक साल के भीतर साठ से अधिक लोगों के जिंदगी से हार मान लेने के आंकड़े और इनमें बड़ी संख्या 16 से 40 वर्ष के युवाओं की होना चिंता और बढ़ाता है। ----
16 से 40 साल के अधिक युवा रामपुर। जिले में साल दर साल जिंदगी के बजाय मौत चुनने वाले की संख्या बढ़ रही है। पिछले कई सालों में साठ से अधिक लोगों ने आत्महत्या की है। इसमे...
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