नई दिल्ली, जून 26 -- पटना हाईकोर्ट ने बिहार के शराबबंदी कानून से जुड़े एक मामले में बड़ा आदेश दिया है। कहा है कि केवल ब्रेथ एनालाइजर की जांच के आधार पर किसी को शराब पीने का दोषी नहीं माना जा सकता। दोष सिद्ध करने के लिए खून की जांच जरूरी है। हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर एक्साइज थाने में 10 साल पहले दर्ज एफआईआर और निचली अदालत के संज्ञान को खारिज कर दिया है। मामला 24 नवंबर 2016 का है। बीएमपी-6 के पास जवान मनोज ठाकुर नशे की हालत में हंगामा करते हुए पकड़ा गया था। एक्साइज विभाग ने ब्रेथ एनालाइजर से जांच की, जिसमें शराब पीने की पुष्टि हुई। एक्साइज थाने में एफआईआर दर्ज कर मनोज को गिरफ्तार कर लिया गया। मनोज बेगूसराय जिले के गोशाला रोड का रहने वाला है। गिरफ्तारी के बाद निचली अदालत ने मामले में संज्ञान ले लिया।सरकारी कर्मी की बर्खास्तगी का नियम बिहार में ...