हापुड़, अगस्त 5 -- हरिद्वार-ब्रजघाट से लेकर दूसरे राज्यों तक हाईवे से निकल रहे कांवडि़यां बस भोले भोले बोलते हैं। कांवड़ कंधे पर रखने के बाद कुत्ता, गाय, बैल, पत्थर, कंकर के नाम भी बदल दिए जाते हैं। ब्रजघाट से कांवड़ों का रैला उठना शुरू हो गया है। मंगलवार को ब्रजघाट तीर्थनगरी से दिल्ली-लखनऊ हाईवे की ओर को काफी संख्या में कांवड़ उठाई गई। भगवान महादेव के जलाभिषेक के लिए गंगा तट से अपने गन्तव्य को जाने वाले कांवडि़यों के मुंह से भोले के सिवा कुछ नहीं निकलती है। हरिद्वार, गौमुख और ब्रजघाट से कांवड़ में जल भरने करे बाद से उनकी दुनिया ही बदल जाती है। किसी को नाम से नहीं पुकारा जाता। केवल भोले, जिस तरह मथुरा में साइड लेने के लिए भी राधे-राध बोलते हैं। वैसे ही उत्तराखंड से यूपी तथा दिल्ली तक जा रहे कांवड़िया हर बात के लिए केवल भोले भोले बोलते हैं...