नई दिल्ली, मार्च 13 -- भारत अपनी ऊर्जा आयात के स्रोतों में तेजी से विविधता ला रहा है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों के मिश्रण को बदलने की दिशा में काम किया है और घरेलू स्तर पर उत्पादित नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दिया है। इसी का नतीजा है कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (अमेरिका-ईराक युद्ध) के चलते जहां विश्व ऊर्जा कीमतों पर व्यापक प्रभाव उछाल आया है और कच्चे तेल की कीमतें बीते दिनों 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। ऐसी स्थिति में भारत में पेट्रोल-डीजल व अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।सरकारी सूत्रों का कहना है कि ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और घरेलू क्षमता को मजबूत करने के लिए बीते एक दशक में सुनियोजित नीतिगत निर्णय लिए गए। बहुआयामी कूटनीति के माध्यम से भारत ने कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए अपने नेटवर्क का विस्ता...
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