बांका, मार्च 1 -- बौंसी, निज संवाददाता। भारतवर्ष विविधताओं में एकता का देश है यही वजह है कि यहां पर विभिन्न पर्व त्यौहार अलग ही रंग में मनाए जाते हैं। होली 3 मार्च को होनी है,आदिवासी समाज सखुआ का पेड़ और फूल आदिवासी समाज सबसे पवित्र व ईश्वर का प्रसाद स्वरूप मानते है। शोभा पाथर निवासी अधिक लाल मरांडी ने बताया कि पर्व के बाद समाज के लोग एक-दूसरे को शुद्ध पानी से भीगों कर आनंद उठाते हैं। मांझी हड़ाम जो गांव के बुजुर्ग पुजारी होते हैं जाहेर थान के पास पुआल का मंडप बनाकर फिर गोबर से जमीन को लिपकर वहीं पर ग्रामीण इक्ट्ठा होते हैं सखुआ के फूल के साथ मारुंग बुरू, मांझी थान, सहित अन्य को स्मरण करते हुए पूजा की जाती है । जिसमें सखुआ के फूल का प्रयोग होता है और इसे काफी पवित्र माना गया है क्योंकि बनवासी प्रकृति प्रेमी होते हैं। पूजा के बाद छोटे छोटे म...