हल्द्वानी, फरवरी 6 -- हल्द्वानी, दीक्षा बिष्ट लमगड़िया। हल्द्वानी के रामपुर रोड स्थित तरणताल की नींव 8 अप्रैल 1999 को इस उम्मीद के साथ रखी गई थी कि यहां से तैराकी की प्रतिभाएं निकलेंगी, वह आज खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। कभी सुबह-शाम बच्चों और युवाओं की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला यह परिसर आज सन्नाटे और बदहाली की चादर ओढ़े हुए है। विडंबना देखिए कि कोरोना काल के दौरान बंद हुआ यह तरणताल महामारी खत्म होने के वर्षों बाद भी दोबारा नहीं खुल सका। वर्तमान में पूरा परिसर जंगल में तब्दील हो चुका है। अब यहां इंसानों के बजाय कीड़े-मकौड़ों का डेरा है। पूलों में भरा गंदा और काई युक्त पानी न केवल बीमारियों को न्योता दे रहा है, बल्कि करोड़ों की सरकारी संपत्ति की बर्बादी की गवाही भी दे रहा है। स्थानीय निवासियों और तैराकों का कहना है कि शहर के बीचों...
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