सहारनपुर, फरवरी 27 -- होली उल्लास से भरा त्योहार है। इस दिन लोग एक-दूसरे पर रंग, गुलाल और अबीर डालकर खुशियां बांटते हैं लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह त्योहार मिलावटखोरों के लिए एक 'मौका' बन गया है। शहर में जहां होली के बाजार सजते हैं और मिठाइयों, नमकीन, गुजिया और रंगों की मांग चरम पर पहुंच जाती है, वहीं मिलावटखोर भी सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में हर कोई तंग रहता है और सभी को रंग में भंग का डर सताता रहता है। ऐसे में त्योहार पर खाद्य पदार्थों और रंगों में मिलावट लोगों की सेहत और त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। त्योहार के दौरान फूड डिपार्टमेंट कार्रवाई करता है, जांच को सैंपल लिए जाते हैं, जिसके बाद पता चलती है कि मिठाइयों में शुद्धता नहीं, मिलावट घुली है। दूध में जहर, मावे में यूरिया और रंगों में केमिकल की मिलावट एक हकीकत बन चुकी है। जिम...