भागलपुर, नवम्बर 17 -- -प्रस्तुति: विजय झा सिमरी बख्तियारपुर-सुपौल रोड के पश्चिमी बहियारों में हर वर्ष दिसंबर के प्रथम सप्ताह से गेहूं की बुवाई शुरू होती थी। कई किसान धान कटते ही नमी वाले खेतों में मटर, मसूर, रैचा और खेसारी जैसी दालों के बीज छिड़क देते थे, जिससे कम लागत में अच्छी पैदावार मिल जाती थी। लेकिन इस बार भारी जलजमाव के कारण पूरी प्रक्रिया ठप है। खेतों में भरा पानी न केवल खरीफ धान की कटनी रोक रहा है, बल्कि रबी फसलों की संभावनाएं भी खत्म होती दिख रही हैं। इससे किसानों के साथ-साथ पशुपालक भी संकट में हैं, क्योंकि गेहूं की भूसा यहां पशुओं के चारे का मुख्य स्रोत है। समय पर गेहूं की खेती नहीं होने पर गंभीर चारा संकट उत्पन्न हो सकता है। अक्तूबर माह के अंतिम सप्ताह में आए चक्रवाती तूफान और बेमौसम बारिश ने प्रखंड क्षेत्र के किसानों पर कहर ब...
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