पूर्णिया, जनवरी 27 -- जिले के लोक कला प्रेमियों की चिंता 12 से अधिक छोटे बड़े महोत्सव होते है जिले में प्रति साल 258 कलाकार है जिले में निबंधित 04 स्थान पर है पूरे राज्य में जिला कलाकार निबंधन में आज जिले में सांस्कृतिक आयोजनों की रफ्तार तेज़ हो गई है। किसी मंच पर लोक गीतों की गूंज सुनाई देती है तो कहीं मंच पर नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ने की कोशिश करती दिख रही है। विलुप्त होती कीर्तन परंपरा से लेकर नाट्य, लोक गायन और सांस्कृतिक उत्सवों को फिर से मंच मिलने लगा है। यह बदलाव सुखद है, लेकिन सवाल अब भी खड़ा है क्या हमारी संस्कृति सिर्फ अपने-अपने क्षेत्रों तक ही सिमट कर रह जाएगी। विद्यापति और स्नेहलता अगर भोजपुर जाएं और भिखारी ठाकुर व महेंद्र मिश्र मिथिला आएं, तभी तो सच्चे अर्थों में सांस्कृतिक संवाद स्थापित होगा। आज भी झिझिया, मैथिली लोकनृत्य...
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