रायबरेली, मार्च 27 -- बेटियों के स्वास्थ्य व सुरक्षा को लेकर प्रयास तो बहुत हो रहे हैं, लेकिन यह जमीनी हकीकत कुछ और है। प्राथमिक विद्यालय हो या फिर पूर्व माध्यमिक सभी जगहों पर छात्राओं के लिए शौचालय तो बने हैं लेकिन इस कदर गंदे हैं कि उनका इस्तेमाल नहीं होता है यही नहीं कई स्कूल तो ऐसे हैं जहां शौचालय के दरवाजे तक टूटे हुए हैं। यह हाल जनपद के करीब चालीस प्रतिशत स्कूलों का है। गंदे व टूटे शौचालयों के कारण छात्राओं को काफी परेशानी होती है। पैड देने की बात तो बहुत की जाती है लेकिन कुछ ही जगहों पर इसे दिया जाता है। वह स्वास्थ्य विभाग के रहमो करम पर मिलता है। यह हाल तब है जब बेटियों के स्वास्थ्य व सुरक्षा को लेकर सरकार दावें कर रही है और इस पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। लेकिन छात्राओें को परेशानी से राहत नहीं मिली है।रायबरेली। प्राथमिक व ...