रायबरेली, मार्च 6 -- सोने और चांदी के आभूषणों में अपनी कला से जान डालने वाले गहना कारीगरों की जिंदगी आज की इस महंगाई में बेजान सी हो गई है। लगातार मेहनत के बावजूद इनको अपना मेहनताना ठीक से नहीं मिल पा रहा है। रही-सही कसर रेडीमेड गहनो ने ले ली है। लोग गहने बनवाने की अपेक्षा बाहर से रेडीमेड गहने मंगवा कर अपना काम चला रहे हैं। इससे उनकी मांग कम हुई है। अधिकतर दुकानों ने अपने कारीगर भी कम कर दिए हैं। मुख्य शहर को छोड़ दें तो तहसील क्षेत्र में नाम मात्र कारीगर है ये लोग बाहर से माल लाकर बेच रहे हैं। आवश्यकता पड़ने पर ही इन कारीगरों से कुछ बहुत सामान बनवा लेते हैं। ऐसे में यह कारीगर कौन सा व्यवसाय करें और कहां जाएं कई लोगों ने यह व्यवसाय बंद कर दूसरा काम शुरू कर दिया है। न ही इनको कोई सरकारी सहायता या प्रशिक्षण मिल रहा है ना ही सस्ता लोन जिससे यह...
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