बोले रांची: शहर के विकास को रफ्तार देने वाले कंधे बदहाल
रांची, मई 18 -- रांची, वरीय संवाददाता। रांची की अर्थव्यवस्था को अपने कंधों पर ढोने वाले मोटिया मजदूर आज भी बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर हैं। हिन्दुस्तान के 'बोले रांची' कार्यक्रम में मजदूरों ने बताया कि अपर बाजार, रातू रोड, हरमू रोड और पंडरा बाजार जैसे प्रमुख व्यापारिक इलाकों में हजारों श्रमिक प्रतिदिन सैकड़ों ट्रकों की लोडिंग-अनलोडिंग करते हैं, लेकिन उनके पास रहने के लिए छत, स्वास्थ्य सुविधाएं और बच्चों की शिक्षा तक की बुनियादी व्यवस्था नहीं है। लगभग 4,000 से अधिक मजदूर वर्षों से राजधानी की आर्थिक गतिविधियों को गति दे रहे हैं, बावजूद इसके इनमें से अधिकांश को सड़क किनारे ही रात बितानी पड़ती है। वहीं, श्रमिक संगठनों का कहना है कि सरकारी उपेक्षा के कारण इन कामगारों का जीवन आज भी सिर्फ संघर्ष और अभावों में सिमट कर रह गया है।
मजदूरों की स्थिति...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.