मुजफ्फर नगर, जनवरी 24 -- उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड की सीमा पर प्रहरी के रूप में विख्यात पुरकाजी कस्बा का इतिहास काफी पुरानी है। यदि पर प्राचीन इतिहास पर नजर डालें जनपद मुजफ्फरनगर के पुरकाजी कस्बे में स्थित सूली वाला बाग स्वतंत्रता संग्राम का एक मौन गवाह है, जिसका इतिहास 1857 की क्रांति से जुड़ा है। यह जलियांवाला बाग (वर्ष1919) से करीब 62 वर्ष पुराना है, जहां अंग्रेजों ने विद्रोही क्रांतिकारियों को पकड़कर फांसी दी थी। क्रांतिकारियों का बलिदान1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में पुरकाजी, थानाभवन, शामली क्षेत्र के करीब 500 500 क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की थी। अंग्रेज कलेक्टर वॉर फोर्ड की हत्या के बाद नए कलेक्टर एडवर्ड ने दमन नीति अपनाई थी और विद्रोहियों को पकड़कर सूली वाला बाग पुरकाजी में पेड़ों पर लटका कर फांसी की सजा सुना...
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